हैदराबाद : केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र द्वारा श्री विजयपुरम, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के माध्यमिक विद्यालय के हिंदी शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए 15 से 26 अप्रैल तक ‘482वें नवीकरण पाठ्यक्रम’ का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्घाटन समारोह 15 अप्रैल को सरकारी माध्यमिक विद्यालय, जंगलीघाट, श्री विजयपुरम के सभागार में संपन्न किया गया।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के निदेशक प्रो. सुनील बाबुराव कुळकर्णी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में प्राचार्य, राज्य शिक्षा संस्थान, श्री विजयपुरम श्रीमती संगीता चंद उपस्थित थीं। सरकारी माध्यमिक विद्यालय, जंगलीघाट की उप प्राचार्य श्रीमती अजीज फातिमा के साथ राज्य शिक्षा संस्थान, श्री विजयपुरम की पाठ्यक्रम समन्वयक श्रीमती रानी एवं श्रीमती गीता की गरिमामय उपस्थिति रही। इस अवसर पर पाठ्यक्रम संयोजक केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक प्रो. गंगाधर वानोडे एवं पाठ्यक्रम प्रभारी डॉ. फत्ताराम नायक, डॉ. मयंक त्रिपाठी, विभागाध्यक्ष (सूचना एवं भाषा प्रौद्योगिकी, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा), डॉ. राधा सगिली एवं अतिथि प्रवक्ता डॉ. रामकृपाल तिवारी जी उपस्थित रहे। इस ‘482वें नवीकरण पाठ्यक्रम’ में कुल 44 (महिला-31, पुरुष-13) माध्यमिक विद्यालय के हिंदी शिक्षकों ने पंजीकरण कराया।

सर्वप्रथम माँ शारदे के समक्ष मंचस्थ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसके पश्चात सरस्वती वंदना विद्यालय के प्राध्यापक चंद्रशेखर पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत की गई। अतिथियों का शॉल एवं पुष्पगुच्छ द्वारा स्वागत क्षेत्रीय निदेशक प्रो. गंगाधर वानोडे द्वारा किया गया। शब्द सुमनों द्वारा स्वागत एवं परिचय श्रीमती गीता जी ने किया। डॉ. गंगाधर वानोडे ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि श्रीमती संगीता चंद ने कहा कि छात्रों के मन में जब प्रश्न उत्पन्न होता तो यह उनके सचेतन होने का प्रतीक है। अध्ययन और अध्यापन कार्य की सफलता तभी तक संभव है जब दोनों में अच्छा तालमेल हो। किसी को बार-बार सुनने से भाषागत सुधार हो सकता है। लिंग भेद तभी मिट सकते हैं जब ध्यान से सुना जाए साथ ही यह अपेक्षा भी जताई कि हिंदी शिक्षण में तकनीकी का प्रयोग कैसे किया जाए जो विद्यार्थियों के भाषाई ज्ञान एवं कौशल को सुदृढ़ करने में मदद करते हैं। यह कार्यक्रम समझ विकसित करने में सहायक होगा। उन्होंने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत पाठ्यक्रम में हुए बदलाव और उसमें दिए गए भाषा कार्य तथा सीखने के परिणाम/प्रतिफल कैसे सामने आएंगे, इस पर विचार करने की आवश्यकता है।

आभासी मंच के माध्यम से केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के निदेशक प्रो. सुनील बाबुराव कुळकर्णी ने कहा कि जिन उद्देश्य को लेकर हम प्रशिक्षण में शामिल हुए हैं वह है भाषा द्वारा न सिर्फ एक दूसरे से संवाद स्थापित करना वरन यह भी समझना कि भाषा कौशल विकास का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। शिक्षा के कारण हमें आध्यामिकता का ज्ञान भी मिलता है। भाषा सुधार के लिए ऐसे प्रशिक्षण बहुत आवश्यक हैं। रोजगार के लिए भाषा शिक्षण के माध्यम से कौशल विकास किस प्रकार संभव है, विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से इस पर भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर कार्यक्रम में प्रतिभागिता कर रहे अध्यापकों ने अपनी अपेक्षाएँ रखते हुए कहा कि मानक हिंदी की पहचान किस प्रकार की जाए? वचन की पहचान, हिंदी उच्चारण संबंधी त्रुटियाँ हमारी प्रमुख समस्या है। साथ ही कक्षा कक्ष में किस प्रकार से नवीनतम शैक्षिक तकनीकों को भाषा शिक्षण में प्रयोग किया जाना लाभप्रद होगा? इस पर भी चर्चा सहायक होगी और आशा व्यक्त की कि इस शिविर के माध्यम से उनका निराकरण होगा।
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इस पाठ्यक्रम के दौरान प्रो. गंगाधर वानोडे भाषाविज्ञान तथा उसके विविध पक्ष, ध्वनि विचार, उच्चारण, भाषा परिमार्जन, भाषा कौशल, डॉ. फत्ताराम नायक हिंदी व्याकरण के विविध पक्ष, रस, छंद एवं अलंकार, शब्द शक्तियाँ, भारतीय ज्ञान परंपरा, डॉ. मयंक त्रिपाठी शिक्षा का अर्थ, उद्देश्य एवं महत्व, शिक्षा के अभिकरणों का सामान्य परिचय, शिक्षा द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय चेतना का विकास, शिक्षा मनोविज्ञान की शिक्षक के लिए उपयोगिता, शिक्षण अधिगम प्रक्रिया, अन्य भाषा शिक्षण की विधियों का सामान्य परिचय, योग शिक्षा एवं पर्यावरण शिक्षा का सामान्य परिचय, डॉ. एन. लक्ष्मी प्रयोजनमूलक हिंदी, शिक्षण में प्रौद्योगिकी का प्रयोग, प्रो. रामकृपाल तिवारी हिंदी साहित्य का इतिहास, हिंदी भाषा का उद्भव और विकास, प्रो. रमेश कुमार भारतीय ज्ञान परंपरा तथा भारतीय दर्शन, डॉ. शिवानी राजभूषण साहित्य शिक्षण आदि विषयों का अध्यापन कार्य संपन्न करेंगे। पूर्व परीक्षण के बाद नियमित कक्षाएँ आरंभ हुईं।

इस कार्यक्रम का संचालन पाठ्यक्रम समन्वयक, राज्य शिक्षा संस्थान, श्री विजयपुरम श्रीमती गीता ने किया तथा केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के हैदराबाद केंद्र की डॉ. राधा सगिली, कार्यालय अधीक्षक ने आभार एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
