हैदराबाद: कादंबिनी क्लब हैदराबाद के तत्वाधान में रविवार को आभासी तकनीक के माध्यम से क्लब की ३७१वीं मासिक गोष्टी का सफल आयोजन डॉक्टर मदन देवी पोकरणा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए डॉ अहिल्या मिश्र (क्लब अध्यक्ष) एवं मीना मुथा कार्यकारी संयोजिका ने आगे बताया कि प्रथम सत्र का आरंभ शुभ्रा मोहंतो द्वारा सुमधुर सरस्वती वंदना की प्रस्तुति से हुआ।
डॉ अहिल्या मिश्र ने स्वागत भाषण में कहा कि कादम्बिनी क्लब इसी माह अपने 30 वर्ष के साहित्यिक सांस्कृतिक यात्रा में प्रवेश कर चुका है। सभी की उपस्थिति का निरंतर साथ क्लब की गतिविधि को आगे बढ़ा रहा है। डॉ अहिल्या मिश्र ने टिप्पणी देते हुए कहा कि हिंदी के लिए विशेष तौर पर क्या होना चाहिए इसके लिए प्रबुद्ध जानकारों को बुलाया जाना चाहिए। आज संगोष्ठी सत्र में मुख्य वक्ता डॉ सुनील पारिख (ज्ञानोदय साहित्य संस्था बंगलौर) कर्नाटक में हिंदी की स्थिति एवं साहित्य सर्जन विषय पर अपनी बात रखेंगे और देवकांत पवार (हिंदी अधिकारी इंडियन बैंक) हिंदी विषय पर विचार रखेंगे।
डॉक्टर सुनील पारिख ने अपने वक्तव्य में कहा कि हिंदी को एक विश्व भाषा के रूप में सम्मान प्राप्त है पर राष्ट्रभाषा के रूप में कोई स्थान नहीं है। कर्नाटक की भौगोलिक एवं हिन्दी की स्थिति पर चर्चा करते हुए उन्होंने आगे बताया कि कक्षा प्रथम से यहाँ अंग्रेजी पढ़ाई जा रही है और हिंदी छठी कक्षा से।
हिंदी अध्यापकों को पदोन्नति नहीं मिलती है। भाषा राष्ट्र, साहित्य और संस्कृति का निर्माण करती है। उन्होंने प्रेमचंद को कोट करते हुए कहा कि “राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा है।” अतः हिंदी का प्रचार प्रसार घर-घर में होना चाहिए। कर्नाटक भौगोलिक संपदा से बहुत सुंदर राज्य है समृद्ध है। हिंदी मराठी कन्नड़ भाषा का त्रिवेणी संगम है। यहाँ हर रविवार को साहित्यिक गतिविधियाँ होती रहती है। कन्नड़ भाषा होते हुए भी हिंदी में लेखन हो रहा है यह उल्लेखनीय बात है। उन्होंने राजा कृष्णदेव राय का उल्लेख करते हुए गोल्डन ऐज का भी स्मरण कराया।
विशेष अतिथि देवकांत पवार ने अपनी बात रखते हुए कहा कि सरकारी कामकाज की भाषा राजभाषा होती है। बैंक, जीवन बीमा दफ्तर, रेलवे आदि कार्यालय विभागों में राजभाषा की उपयोगिता होती है। संघ की भाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होनी चाहिए। केंद्र सरकार का कर्तव्य है कि वह हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार करे और विकास करे। संस्कृत आदि अन्य भाषाओं से भी हमें शब्द लेनी चाहिए। 1963 से पहले हिंदी विरोधी आंदोलन के बाद कई दस्तावेज हिंदी में निकाले गए। हिंदी अनुवादक की भर्ती की जाने लगी। केंद्र सरकार हिंदी ट्रेनिंग की कक्षाएं भी संचालित करती है और कंप्यूटर प्रशिक्षण हिंदी में हो इस बात पर भी विचार किया जा रहा है।
दूसरे सत्र में मीना मुथा के संचालन में कवि गोष्ठी हुई। इस कवि गोष्ठी में किरण सिंह, मनीषा, तृप्ति मिश्रा, रमा बहेड़, डॉक्टर रमा द्विवेदी, डॉक्टर इंदू सिंह, रेणु शब्दमुखर, आर्या झा, तरुणा, ज्योति नारायण, अंशु श्री सक्सेना, विनोद गिरी अनोखा, भगवती अग्रवाल, डॉक्टर संगीता शर्मा, आशीष नैथानी, विनीता शर्मा, डॉक्टर सुनील पारीख, देवकांत पवार, डॉ अहिल्या मिश्र , मीना मुथा, भावना पुरोहित आदि ने काव्य पाठ किया। दीपा कृष्णदीप, सुरभि दत्त, प्रदीप भट्ट, वेंकटेश्वर राव, अवधेश कुमार सिन्हा व सत्यनारायण काकड़ा की उपस्थिति बनी रही।
अध्यक्षीय टिप्पणी में डॉक्टर मदन देवी पोकरणा ने कहा कि दोनों ही वक्ताओं ने महत्वपूर्ण जानकारी हिन्दी के विकास व प्रचार- प्रसार के संदर्भ में दी है। सभी ने बहुत ही अच्छी रचनाएं भी सुनाई है। उन्होंने सभी को साधुवाद दिया। प्रवीण प्रणव और डॉक्टर आशा मिश्रा ने आभासी तकनीकी की व्यवस्था को संचालित किया। डॉ रमा द्विवेदी ने आभार व्यक्त किया। अवसर पर साहित्य गरिमा पुरस्कार हेतु प्रविष्टियों की जानकारी भी दी गई।
गौरतलब है कि साहित्य गरिमा पुरस्कार दक्षिण प्रांतों के महिला लेखन को प्रोत्साहन एवं प्रतिष्ठित करने का व्यापक चिंतन है| साहित्य की विविध विधाओं की चयनित विधा पर महिला लेखन को यह पुरस्कार देने का निर्णय लिया गया है | इस बार कहानी और उपन्यास विधा पर यह पुरस्कार दो लेखिकाओं को दिया जायेगा | इस पुरस्कार के लिए इक्कीस हजार रुपए की धनराशि ,प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह आदि एक भव्य समारोह में दिया जाता है |
बारहवाँ और तेरहवाँ साहित्य गरिमा पुरस्कार वर्ष 2022 /2023 दक्षिण प्रांतों आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, गोवा,केरल, लक्ष्यदीप एवं पांडुचेरी आदि अहिन्दी भाषी प्रांतों की लेखिकाओं को जिनकी पुस्तक उपरोक्त विधा कहानी पर हिंदी में वर्ष 2017 – 2022 के बीच प्रकाशित हुई हो एवं उपन्यास विधा पर हिंदी में वर्ष 2018 -2023 के बीच प्रकाशित हुई हो, वे इस पुरस्कार के लिए प्रविष्ठियों के रूप में चार -चार पुस्तकें, जीवन परिचय एवं नवीनतम दो छाया चित्र और निजी पता लिखा व टिकट लगा लिफाफा सामग्री के साथ भिजवाएँ| पुस्तक कम से कम सौ पृष्ठों की होनी चाहिए|
सामग्री के लिफाफे पर “प्रविष्ठियाँ साहित्य गरिमा पुरस्कार -2022 /2023 ” साफ – साफ बड़े अक्षरों में लिखें| प्रविष्ठियाँ भेजने की अंतिम तिथि 31 अगस्त – 2023 है| कोविड महामारी के कारण वर्ष 2020 और वर्ष – 2021 का साहित्य गरिमा पुरस्कार निरस्त कर दिया गया है| अन्य हिंदी प्रदेशों के रचनाकार जो विगत दस वर्ष से दक्षिण प्रदेशों में रह रहें हैं, वे इस पुरस्कार हेतु प्रविष्ठि भेज सकते हैं| अधिक जानकारी हेतु डॉ अहिल्या मिश्र -9849742803 / 7981640328 या डॉ. रमा द्विवेदी -9849021742 से संपर्क करें|
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डॉ अहिल्या मिश्र, संस्थापक अध्यक्ष ,
शांडिल्य-सार्त्रम
E -54 , मधुरा नगर, हैदराबाद-500038 (तेलंगाना)
फोन :7981640328/ 9849742803
