‘देखा जाय तो देश के सारे राज्यों को कश्मीर सा बनना चाहिए था, परन्तु बचा हुआ कश्मीर भी अब दूसरे राज्यों की तरह बन जाने का डर है.’ यह है एन आर श्याम के सद्य: प्रकाशित यात्रा वृतांत ‘कश्मीर जैसा मैंने देखा’ का अंतिम निष्कर्ष. यह यात्रा वृतांत 110 पृष्ठों का है. जैसा कि उन्होंने इस पुस्तक की भूमिका ‘मेरी बात’ में लिखी है, उनकी कश्मीर की यात्रा 23.06.2023 से 04.07.2023 तक की थी.
यात्रा वृतांत लेखन में एन आर श्याम के सिद्धस्तता से कदापि इंकार नहीं किया जा सकता है. इससे पहले भी उन्होंने इसी तरह लम्बे – लम्बे यात्रा वृतांत लिखे हैं. तेलंगाना के आदिलाबाद जिले के आदिवासी नागोबा मेले की यात्रा पर ‘नागोबा का मेला’, ‘जलते जंगल की सैर’ शीर्षक से रॉयल सीमा की यात्रा, ‘जहाँ आदमी को जिन्दा दफनाया जाता है’, राजस्थान की ‘उँटों के देश में’, तेलंगाना के मेडारम अंचल में भरने वाले मेले पर ‘भारत का दूसरा सबसे बड़ा मेला सम्मक्का सारक्का’ और उत्तराखंड की अपनी यात्राओं को समग्रता में समेटते हुए यात्रा वृतांत लिखे हैं.
लेखक श्याम के अनुसार कश्मीर की यात्रा पर ढेर सारे अनुभवों से गुजरने के बाद भी वे इस यात्रा पर लिखना टालते रहे. पर उनके लिए यह एक हंटिंग ही था. एक तरह बेचैनी… अपराध भावना. मन में किसी आतंरिक कोने में उन्हें यह बात सलती रही कि अगर वे नहीं लिखेंगे तो कश्मीर की अवाम उन्हें कभी माफ नहीं करेगी. इस कारण जब बेचैनी बर्दास्त से बाहर हो गयी तो दो वर्षों बाद उन्होंने यह यात्रा वृतांत लिखा है.
यह भी पढ़ें-
पुस्तक पढ़ने के बाद लगा कि उनका यह मानना गलत नहीं था. कश्मीर की एक तस्वीर वह है जो हमारे जेहन में बहुत अंदर तक स्थापित हो चुकी है और एक तस्वीर वह है जिससे वे हमें रूबरू कराते हैं. अगर यह पुस्तक नहीं पढ़ा जाता तो इसके दूसरे रूप से बिल्कुल अनभिज्ञ ही रहता. अपने इस यात्रा वृतांत में वहाँ के दार्शनिक स्थलों की अनूठी प्राकृतिक सुंदरता के साथ ही वे हमें वहां के अनूठे जन -जीवन, वहां की अनूठी संस्कृति, अनूठे खान पान, घोर अभाव ग्रस्त हालात में भी उनकी नेकनीयती के दर्शन कराते हैं. इन सबसे ऊपर है उनकी अनूठी मेहमानवाजी जो उन्हें दूसरे राज्यों से अलग करती है.
यही नहीं देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की बलि देने वाले, एक तरह से इतिहास के पन्नों से विस्मृत हो जाने वाले अमर वीरों से भी हमें परिचित कराते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. हमें पता है एन आर श्याम एक कहानीकार हैं. उनके दूसरे यात्रा वृतांतों की तरह इस यात्रा वृतांत में भी कहानीपन झलकता है. उनकी यही विशेषता उन्हें दूसरे यात्रा वृतांतकारों से अलग करती है. यही उनकी पहचान भी है.
इसी कहानीपन के कारण ही यात्रा वृतांत में पाठनीयता और अंत तक उत्सुकता बनी रहती है. पाठक एक बार आरम्भ करने पर अंत तक बिना पढ़े नहीं रहता है और लगभग एक ही सिटिंग में पढ़कर समाप्त कार देता है. इस बात में कोई संदेह नहीं है कि उनका यह यात्रा वृतांत हिंदी यात्रा वृतांत लेखन में एक मील का पत्थर है. इसे सभी को पढ़ना और जानना चाहिए.
पुस्तक: ‘कश्मीर: जैसा मैंने देखा’
प्रकाशक: न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन
C-515, बुद्ध नगर, इंद्रपुरी,
नई दिल्ली-110012
मूल्य: ₹ 225
मो: 8750688053
