हैदराबाद : साहित्य सेवा समिति की 132 वीं गोष्ठी का सफल आयोजन 1 फरवरी को ऑनलाइन प्रारूप में किया गया। ‘वर्तमान भारत में विविध शिक्षा प्रणालियां: गुण दोष के संदर्भ में’ गोष्ठी का विषय रहा है। यह सारगर्भित गोष्ठी साहित्य सेवा समिति के अध्यक्ष डॉक्टर दयाकृष्ण गोयल व साहित्य सेवा समिति के महामंत्री ममता जायसवाल के सान्निध्य में संपन्न हुई।
गोष्ठी के प्रारंभ में नीमा रवि ने अपने मधुर कंठ से सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। तदुपरांत डॉक्टर दया कृष्ण गोयल ने कार्यक्रम के अध्यक्ष के रूप में स्वागत भाषण दिया। उन्होंने विषय के विचार बिंदुओं को प्राचीन से अर्वाचीन भारत की पृष्ठभूमि को केंद्रित करते विस्तार से समझाया। इसी विषय पर प्रमुख कवि और लेखक सुनीता लुल्ला ने विविध शिक्षण पद्धतियों,पाठ्यक्रम की विविधताओं, भाषा संप्रेषण आदि पर प्रकाश डाला। प्रस्तुत विषय को पूर्णता हस्ताक्षरित करते हुए प्रमुख प्रवक्ता बी. एल आच्छा ने विषय के समग्र बिंदुओं को अपनी विहग दृष्टि से वैश्विक दृष्टिकोण को समायोजित कर विषय को सारगर्भित रूप प्रदान किया।

इसी विषय को आगे बढ़ाते हुए अभिजीत पाठक ने विषय अनुसार पौराणिक दृष्टांतों का प्रयोग कर विषय को लाभान्वित किया। समिति की महामंत्री व प्रथम सत्र संचालिका ममता जायसवाल ने शिक्षण को जीवंत प्रक्रिया मानते हुए शिक्षण पद्धतियों को समसामयिक व पौराणिक दृष्टिकोण से अभिषिक्त कर उसे अभिपोषित किया। ताज फातिमा ने विषय क्रम में अपने विचारों द्वारा यह बताया की इस्लाम में स्त्री शिक्षा को महत्व दिया जाता है।
द्वितीय सत्र की संचालिका गीता अग्रवाल ने विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए तकनीकी शिक्षण ज्ञान को महत्व पर बल दिया। वहीं, प्रमुख अनुवादक और कवि जी परमेश्वर ने राष्ट्रीय हित हेतु स्काउट गाइड एवं एनसीसी जैसे महत्वपूर्ण सह शिक्षण विधाओं की अनिवार्यता को समझाया। समग्र विषय आंकलन पर एकमत रहा है। सभी सारांश रहा है कि मानव उत्थान ही शिक्षण पद्धति का आधार रहे।
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रंगमय काव्य गोष्ठी में ताज फातिमा, कृष्ण प्रकाश अग्रवाल, मंजू भारद्वाज, रफिया नौशीन, डॉक्टर ऋतु शुक्ला, बैजनाथ सुनहरे, भारती अग्रवाल, प्रदीप देवी शरण भट्ट, उमेश चंद्र यादव, प्रहलाद जोशी, ममता जायसवाल, हर्ष लता दुधोडिया, सुनीता लुल्ला, गीता अग्रवाल व डॉ दया कृष्ण गोयल ने अपनी मौलिक काव्या रचनाओं का पाठ प्रस्तुत किया। इंदू सिंह, वर्षा शर्मा, अभिजीत पाठक, गिरधारी लाल गुप्ता, नीमा रवि ने अमूल्य उपस्थिति दर्ज की। कवि और लेखक डॉक्टर ऋतु शुक्ला के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम की समाप्ति हुई।
