हैदराबाद : कादम्बिनी क्लब हैदराबाद एवं तारनाका राइटर्स फोरम के संयुक्त तत्वावधान में 18 जनवरी को रामकोट स्थित कीमती सभागार में मूल रूप में तेलुगु में डॉ. ईटेला सम्मन्ना द्वारा लिखित और हिंदी में जी. परमेश्वर द्वारा अनूदित काव्यकृति ‘सत्य-दर्शन’ का लोकार्पण व काव्य पाठ का आयोजन किया गया।
प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए मीना मुथा (कार्यकारी अध्यक्षा) एवं प्रवीण प्रणव (महासचिव) ने बताया कि मुख्य अतिथि और लोकार्पणकर्ता के रूप में पधारे सांसद ईटेला राजेन्द्र ने काव्य-कृति का लोकार्पण किया। प्रो. ऋषभदेव शर्मा (वरिष्ठ साहित्यकार) ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। आत्मीय अतिथि के रूप में जे एन टी यू के पूर्व उपकुलपति प्रो. जी. लक्ष्मीनारायणा, विशिष्ट अतिथि के रूप में तारनाका राइटर्स फोरम के अध्यक्ष डॉ. रघु कुमार, कृति के मूल लेखक डॉ. ईटेला सम्मन्ना, कृति के हिंदी अनुवादक जी. परमेश्वर और कादम्बिनी क्लब के महासचिव प्रवीण प्रणव मंचासीन हुए।

मीना मुथा के संचालन में माननीय अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के उपरांत श्रीमती शुभ्रा मोहंतो ने माँ शारदे की वंदना प्रस्तुत की। स्वागत संबोधन में उन्होंने कहा कि क्लब की 402 मासिक गोष्ठी हमारी संस्थापिका स्व. डॉ. अहिल्या मिश्र के बिना हो रहा है और यह क्लब के सदस्यों के लिए कठिन समय है। लेकिन जैसा हमारी अध्यक्षा कहा करती थीं ‘चरैवेती- चरैवेती’, तो क्लब के सदस्य इस कारवां और संस्था की निरंतरता को बनाए रखने के लिए कृत-संकल्पित हैं। सदस्यों ने स्व. डॉ. अहिल्या मिश्र को याद करते हुए दो मिनट का मौन रखा।
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डॉ. रक्षा मेहता ने मुख्य अतिथि माननीय सांसद ईटेला राजेन्द्र और अध्यक्ष प्रो. ऋषभदेव शर्मा का परिचय दिया। डॉ. सुषमा देवी ने आत्मीय अतिथि और विशिष्ट अतिथि का परिचय दिया। डॉ. कृष्णा सिंह ने मूल लेखक और हिंदी अनुवादक का परिचय दिया। देवा प्रसाद मायला ने काव्य कृति ‘सत्य दर्शन’ की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने संग्रह की कविताओं को सरल बताते हुए कहा कि रचनाएँ सहज ही पाठकों को जीवन-दर्शन से जोड़ती हैं। उन्होंने कृति के हिंदी अनुवादक जी. परमेश्वर की प्रशंसा करते हुए कहा कि तेलुगु और हिंदी दोनों ही भाषाओं की अच्छी जानकारी होने की वजह से उनके द्वारा अनूदित रचनाओं को पढ़ते हुए मूल कृति को पढ़ने जैसा ही आनंद मिलता है।
लोकार्पणकर्ता सांसद ईटेला राजेन्द्र और मंचासीन अतिथियों के हाथों काव्य-कृति ‘सत्य-दर्शन’ का लोकार्पण किया गया। लोकार्पण वक्तव्य में ईटेला राजेन्द्र ने जीवन में विशेषकर सामाजिक जीवन में शुचिता और सत्य के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस कृति के मूल लेखक डॉ. ईटेला सम्मन्ना की प्रशंसा करते हुए कहा कि बड़े भाई के रूप में उन्होंने मुझे हमेशा सत्य की राह पर चलने के लिए प्रेरित किया है।
विशिष्ट अतिथि और तारनाका राइटर्स फोरम के अध्यक्ष डॉ. रघु कुमार ने कहा कि सत्य एक ही है जिसे ‘एकम सत विप्रा बहुधा वदन्ति’ कहा गया है। इस संग्रह की रचनाओं में सत्य के प्रति उसी एकात्मकता का आग्रह है। आत्मीय अतिथि और जे एन टी यू के पूर्व उपकुलपति प्रो. जी. लक्ष्मीनारायणा ने इस संग्रह को दर्शन से जोड़ते हुए कहा कि एको अहं, द्वितीयो नास्ति अर्थात् जैसे परम सत्ता एक ही है दूसरा नहीं, वैसे ही सत्य भी एक ही है और यह संग्रह हमें उसी सत्य के क़रीब लाता है।
कृति के मूल लेखक डॉ ईटेला सम्मन्ना ने कहा कि मेरी कृति के हिंदी अनुवाद होने से यह संग्रह अब उन पाठकों तक भी पहुँचेगा जहाँ पहले इसे नहीं पढ़ा या समझा जा सका। अनुवादक जी. परमेश्वर ने कहा कि अच्छी रचनाएँ अपने आप ही आपको अनुवाद करने के लिए प्रेरित करती हैं। सत्य-दर्शन मेरे हाथ में आते ही मैंने इसका हिंदी अनुवाद कर दिया था। जब डॉ ईटेला सम्मन्ना ने मुझसे अनुवाद करने का आग्रह किया तो मैंने कहा कि मैं अनुवाद नहीं करूँगा क्योंकि मैं आपके कहने से पहले ही इस कृति का अनुवाद कर चुका हूँ।
महासचिव प्रवीण प्रणव ने कहा कि डॉ ईटेला सम्मन्ना ने अपने पुत्र के असामयिक निधन के पश्चात ईश्वर से संवाद करते हुए इन रचनाओं को लिखा है और आज कादम्बिनी क्लब अपनी अध्यक्षा के दिवंगत होने के बाद पहली बैठक कर रहा है। इस दुख से उबरने के लिए भले ही हम कितनी भी गीता पढ़ लें लेकिन यह दुख को कम करने में सहायक नहीं होता। वक्त ही इस घाव का सही मरहम है। अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने मूल लेखक और अनुवादक दोनों को बधाई दी। उन्होंने इस संग्रह से तीन रचनाओं का पाठ भी किया।
इस मंच से पुष्पक साहित्यिकी पत्रिका के अक्टूबर-दिसंबर 2025 अंक का लोकार्पण भी किया गया। इस अंक के बारे में बात करते हुए संपादक प्रवीण प्रणव और डॉ आशा मिश्र मुक्ता ने कहा कि यह अंक हमारे लिए विशेष है क्योंकि इस अंक के लिए सामग्री चयन से ले कर प्रूफ रीडिंग तक हमारी प्रधान सम्पादिका स्व. डॉ. अहिल्या मिश्र ने की। उनकी प्रेरणा से आगे भी इस पत्रिका के अंक प्रकाशित होते रहेंगे। क्लब की कोषाध्यक्ष डॉ. आशा मिश्र ‘मुक्ता’ ने प्रथम सत्र का आभार और धन्यवाद ज्ञापन किया।
भोजनावकाश के बाद दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने की। इंदुशेखर त्रिपाठी और जी. परमेश्वर भी मंचासीन रहे। अंतरिक्ष विभाग (भारत सरकार) की हिन्दी सलाहकार समिति के ग़ैर-सरकारी सदस्य के रूप में प्रो. ऋषभदेव शर्मा के मनोनयन पर कादम्बिनी क्लब द्वारा उनका सम्मान किया गया। प्रो. शर्मा की अध्यक्षता में उपस्थित सदस्यों ने काव्यपाठ किया। क्लब की संस्थापिका स्व. डॉ. अहिल्या मिश्र को याद करते हुए प्रवीण प्रणव ने शेर पढ़ा “कई पत्थर तुम्हें करने थे अभी और मोम/ कई सूरज को थे तुम आँख दिखाने वाले/ मुंतज़िर हूँ पर तुम लौट कर नहीं आने वाले/ स्नेह के बंधन तोड़ बेवक्त तुम जाने वाले।” प्रो. शर्मा ने अध्यक्षीय काव्य पाठ में अहिल्या जी को याद करते हुए अपनी रचना पढ़ी “काल ने छीन ली काया तुम्हारी/ पर चादर तो यह अजर-अमर है न/ यहीं रहेगी सदा हमारे साथ/ तुम्हारे शब्दों की चादर।” इस सत्र का संचालन और कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन मीना मुथा ने किया।
इस कार्यक्रम में मीना मुथा, जी वनजा, आई एस त्रिपाठी, सुषमा त्रिपाठी, भावना मयूर पुरोहित, जी परमेश्वर, जितेन्द्र प्रकाश, जया, सुहास भटनागर, देवा प्रसाद मायला, लता संघी, डॉ रक्षा मेहता, डॉ कृष्णा सिंह, डॉ एन किशोर रेड्डी, एम श्रीवाणी, डॉ सुषमा देवी, वी नवीन कुमार, हर्षलता दुधोरिया, डॉ टी वी राव, डॉ वी रामा राव, प्रो नायडू अशोक, डी लक्ष्मी नारायण, जनार्दन राव, निम्मा नारायणा, टी के चारी, जी लक्ष्मी नारायण, डॉ ए रघु कुमार, पी रविन्द्र, के प्रकाश, डॉ डी संबैय्या, कोकिला रेड्डी, मीरा ठाकुर, दीपा चित्रकार, चन्द्र लेखा कोठारी, डॉ आशा मिश्रा, इंदु सिंह, क्षितिज गुडला, सतीश गुडला, सत्यनारायणा काकड़ा, बथुकम्मा राजशेखर, पट्टाला अशोक, नीतीश पांडे, ई. भरदैया और अन्य की उपस्थिति रही।
