हैदराबाद : डंकी रूट से अमेरिका गए 104 भारतीय प्रवासियों का सपना टूट गया। भारत वापस भेजे गए ज्यादातर भारतीयों ने दलालों की चंगुल में फंसकर अपनी जान को जोखिम में डाल दी। इन प्रवासियों ने दलालों को वर्क वीजा के लिए लाखों रुपये दिए। लेकिन उनके साथ धोखा किया गया। नतीजा यह हुआ कि इन सबकी जान खतरे में पड़ गई। खतरनाक समुद्र और घने जंगलों में पैदल चलना पड़ा। घर छोड़ने के बाद उनके पास वापस लौटने का कोई रास्ता बचा नहीं था। जंगलों, पहाड़ों और समंदर के इस दर्दनाक सफर का खौफनाक पल दिल दहलाने वाला रहा है। ऐसे मुसीबत में फंसे लोगों में किसी की तबियत खराब हो जाती थी, तो उसे मरने के लिए वहीं पर छोड़ आगे का सफर करना पड़ा।
पंजाब के होशियारपुर के रहने वाले हरविंदर सिंह ने इस सफर में ऐसे कई लाशें देखीं, जो अमेरिका जाने और भविष्य के सपने को पूरा करने के लिए निकल पड़े थे। तहली गांव निवासी हरविंदर को एजेंट ने वर्क परमिट और वीजा दिलाने का वादा किया था। इसके लिए उसने एजेंट को 42 लाख रुपये दिए थे। जब कानूनी तौर से जाने का दिन आया तो एजेंट ने बताया कि वीजा नहीं मिला है, मगर वह किसी तरह उसे अमेरिका भेज देगा। यह एक चूक हरविंदर को भारी पड़ गई। हरविंदर ने बताया कि उसे दिल्ली से कतर भेजा गया। फिर ब्राजील की फ्लाइट में बैठा दिया। इस फ्लाइट में कई लोग ऐसे थे, जिन्हें अमेरिका भेजा जा रहा था। जाने-अनजाने वह अवैध डंकी रूट के जत्थे का हिस्सा बन गए।
ब्राजील पहुंचने पर हरविंदर सिंह के जत्थे को टैक्सियों से पहले कोलंबिया, फिर पनामा ले गए। वहां भी संकट खत्म नहीं हुआ। दो दिनों तक उन्हें गधे से यात्रा करनी पड़ी। फिर गरजते समुद्र में चार घंटे की खौफनाक यात्रा करनी पड़ी। एजेंट ने हरविंदर और उनके साथ आए प्रवासियों को छोटी सी नाव में बैठाकर मैक्सिको बॉर्डर की ओर भेज दिया। समंदर की लहरों में उनकी नाव पलट गई और उनके साथ आए एक प्रवासी की मौत हो गई। बेरहम एजेंट ने उसकी लाश को वहीं छोड़ने को कहा और जत्था आगे बढ़ गया। उनके साथ चल रहे एक व्यक्ति ने पनामा के जंगल में पैदल चलने के दौरान दम तोड़ दिया। उसकी लाश को छोड़कर जत्था आगे बढ़ता रहा। इस पूरे रास्ते में उन्हें खाने के लिए चावल ही मिला, जिसने उन्हें जिंदा रखा।
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एक अन्य यात्री दारापुर गांव निवासी सुखपाल सिंह की अमेरिका यात्रा इससे भी भयानक खतरनाक रही है। सुखपाल को समुद्री रास्ते से 15 घंटे की यात्रा करनी पड़ी। वह गहरी-दुर्गम घाटियों से घिरी पहाड़ियों से 40-45 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। अगर सफर के दौरान कोई घायल हो जाता, तो उसे मरने के लिए छोड़ दिया जाता। उसने भी जंगलों और पहाड़ों में कई शव देखे। अमेरिका में प्रवेश से पहले उसे 14 दिनों तक अंधेरी कोठरी में रखा गया। इस 14 दिनों तक वह सूरज तो दूर, रोशनी भी नहीं देखी। सुखपाल सिंह ने बताया कि अपनी यात्रा में उन्होंने हजारों लड़कों, परिवार और बच्चों को देखा, जो अमेरिका जाने की जिद में अपनी जान दांव पर लगा रहे थे। उन्हें मैक्सिको के रास्ते अमेरिका में भेजा जा रहा था, मगर वह कदम रखते ही गिरफ्तार हो गए।
अमेरिका से भारत लौटे जसपाल सिंह ने भी अमेरिका जाने के लिए 30 लाख रुपये एजेंट को दिए थे, मगर उसके साथ धोखा किया गया। फतेहगढ़ साहिब के जसविंदर सिंह को विदेश भेजने के लिए परिवार ने 50 लाख रुपए खर्च किए। कपूरथला के गुरप्रीत सिंह ने अमेरिका जाने के लिए अपना घर गिरवी रख दिया और पैसे उधार लिए। अमेरिका से लौटाकर आये 104 अवैध प्रवासियों में 33 हरियाणा के, 33 गुजरात के, 30 पंजाब के और महाराष्ट्र-यूपी के दो-दो शामिल हैं। इन लोगों ने कर्ज लेकर एजेंटों को पैसे दिए थे। अब वे भारी कर्ज में डूबे हुए हैं। निर्वासित लोगों में 19 महिलाएं और 13 नाबालिग शामिल हैं, जिनमें एक चार वर्षीय लड़का और पांच और सात साल की दो लड़कियां शामिल हैं। (एजेंसियां)