विशेष: लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती, आर्य समाज के बारे में कही यह बात

स्वतन्त्र भारत के पहले गृह मंत्री और उप प्रधान मंत्री, लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात में नडियाद में एक किसान परिवार में हुआ था। भारतीय स्वतन्त्रता के समय, अधिकतर प्रांतीय समितियां सरदार पटेल के पक्ष में थी की उन्हें ही प्रधान मंत्री नियुक्त किया जाए। गांधी जी इच्छा नेहरू पर थी जिस कारण सरदार ने नेहरू को समर्थन कर, प्रधान मंत्री पद से अपने को दूर रखा।

बाद में उन्हें गृह मंत्री और उप-प्रधान मंत्री पद सौंपा गया, जिसमें उनकी पहली प्राथमिकता, देशी छोटी छोटी और बड़ी रियासतों को भारत में शामिल करना था। उन्होने बगैर किसी बड़े लड़ाई-झगडे के बखूबी 560 रियासतों को स्वतंत्र अखण्ड भारत में विलय किया जो विश्व की बहुत बड़ी घटना कही जा सकती है।

सभी रियासतों को भारत में विलय के पश्चात, सरदार हैदराबाद पर अधिक ध्यान देने लगे। क्योंकि यह भारत के मध्य में बहुत बड़ी रियासत थी और यहां पर हिन्दुओं की जनसंख्या 85 फीसदी से भी अधिक थी और शासक एक क्रूर मुस्लिम था और रजाकारों द्वारा छूट देकर हिन्दुओं को परेशान कर उनको हैदराबाद से निरन्तर पलायन को मजबूर कर रहा था और मुस्लिमों को हैदराबाद में बुलाकर बसाया जा रहा था।

हैदराबाद में भारत के विलय को लेकर जन साधारण में आर्य समाज का बहुत बड़ा योगदान महत्त्वपूर्ण सिद्ध हुआ है। इसी कारण, सरदार ने कहा था कि आर्य समाज ने ऑपरेशन पोलो, पुलिस एक्शन के कार्य को बहुत ही आसान बना दिया। आर्य समाज के कार्यकर्ताओं के त्याग, तपस्या, समर्पण, बलिदानों को ना केवल आर्य समाज, बल्कि भारतवर्ष के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा।

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सरदार बड़े चिन्तित रहते थे हैदराबाद के विलय के सम्बन्ध में क्योंकि, यह सबसे बड़ी रियासत तो थी ही, पाकिस्तान के प्रोत्साहन से निज़ाम ने स्वतन्त्र राज्य का दावा और सेना में बढ़ोतरी शुरू कर दी थी। सारे हथियार आयात करता रहा और उसमें बढ़ावा दिख रहा था। इसी कारण अंततः भारतीय सेना 13 सितम्बर 1948 को हैदराबाद में प्रवेश शुरू कर दी और निजाम को 3 दिन में ही आत्मसमर्पण करना पड़ा।

हैदराबाद मुक्ति दिवस की अमृत महोत्सव वर्ष में हम सरदार को कैसे भूल सकते हैं, जिनके कारण हम आज भारतीय कहलाते हैं। स्वतंत्रता सेनानी पण्डित गंगाराम स्मारक मंच, इस शुभ अवसर पर, सरदार के लिए, सभी से विनम्र निवेदन करती है कि उन्हें याद करके हैदराबाद मुक्ति संग्राम में उनकी उपलब्धियों को जनता तक लाया जाये और इस पीढ़ी को भी बताया जाये।

सरदार वल्लभ भाई पटेल ने एक बार कहा था कि आर्य समाज ने हिंदू से मुसलमान बनने वालों की शुद्धि करके वापस ही नहीं लिया अपितु जन्म के मुस्लिम और ईसाइयों को भी आर्य धर्म की दीक्षा देकर मूल को ब्याज समेत लेने का शानदार कार्य किया है। आर्य समाज तथाकथित हिंदुओं को कीचड़ से निकालना चाहता है।

मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे परिवार सहित, विश्व की विशालतम मूर्ति, सरदार पटेल, की देखने का मंगलवार, 17 मई 2022 को कड़कड़ाती धूप में, अवसर प्राप्त हुआ। विश्व स्तर की सुविधाओं से युक्त यह भारतीयों के लिए एक तीर्थ स्थल बन गया है जहां पर हमने देखा, हर प्रान्त के निवासी सरदार को नमन करते दिख रहे थे।

लेखक – भक्तराम, अध्यक्ष, स्वतंत्रता सेनानी पण्डित गंगाराम स्मारक मंच

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