दलित आदिवासी दंडोरा सभा: रेवंत रेड्डी ने ऐसा क्या कह दिया लोग भारी बारिश में भी सुनते ही रह गये

हैदराबाद : टीपीसीसी के अध्यक्ष रेवंत रेड्डी ने कहा कि दलित बंधु योजना के तहत दिये जाने वाले 10 लाख रुपये किसी का भीख नहीं है। यह दलितों का अधिकार है। दलित और आदिवासी इस समय शिक्षा और रोजगार चाहते हैं। मगर केसीआर ऐसा नहीं कर रहे हैं। तेलंगाना के लोगों का पेट जल रहा है। तेलंगाना के आंदोलनकारी गुस्से में है। लोग सवाल कर रहे है कि क्या हमें और 19 महीने केसीआर के शासन रहना है? टीआरएस के शासन को पाताल में दफनाने के दिन नजदीक हैं।

भारी बारिश में भी सुनते रहे

तेलंगाना कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में हैदराबाद के सीमांत क्षेत्र राविर्याला में बुधवार को ‘दलित आदिवासी स्वाभिमान दंडोरा सभा’ का आयोजन किया गया। सभा में तेलंगाना कांग्रेस के मामलों के प्रभारी मणिकम टैगोर, एआईसीसी सचिव श्रीनिवासन और बोसु राजू के साथ रेवंत रेड्डी ने भाग लिया। शाम को आयोजित सभा में भारी बारिश हो रही थी, मगर लोग जाने का नाम तक नहीं ले रहे थे। रेवंत रेड्डी का भाषण मन लगाकर सुनते रहे हैं।

बाकि बचा एक कदम केसीआर के सिर पर

इस अवसर पर रेवंत रेड्डी ने कहा, “क्रांति के मैदान इंद्रवेल्ली में पहला कदम रखा है। दूसरा कदम महेश्वरम में रखा है। अगर कांग्रेस के कार्यकर्ता कदम आगे बढ़ाते हैं, तो बाकि बचा एक कदम केसीआर के सिर पर रखूंगा। सोनिया गांधी ने मुझे पीसीसी अध्यक्ष बनाये जाने से प्रगति भवन में आंधी और तूफान आ गया। केसीआर दिल में मैं एक भाला बनकर उतर गया हूं।”

तेलंगाना में कौन लूटकर ले रहा है

तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष ने जोर देकर कहा, “तेलंगाना के आंदोलनकारी केसीआर के शासन में और 19 महीने रहने को लेकर काफी गुस्से में हैं। उपचुनाव वाले एक मात्र निर्वाचन क्षेत्र में दलित परिवार को 10 लाख रुपये दे रहे हैं। तेलंगाना आंदोलन में किसकी मौत हो गई है? समाज के उन लोगों को सोचना चाहिए कि संघर्ष करके हासिल किये गये तेलंगाना में कौन लूटकर ले रहा है। केसीआर के शासन में छात्र, आंदोलकारी, बेरोजगार युवक, शहीदों के परिवार, किसान, दलित, आदिवासी, गिरीजन और कमजोर वर्गों का शोषण हो रहा है।”

10 लाख भीख नहीं है

रेवंत ने कहा, “दलित और आदिवासी शहीदों की शपथ लेकर कह रहा हूं। केसीआर आप जो 10 लाख रुपये देते हैं वह हमारे लिए कोई भिक्षा नहीं है। टैक्स के रूप में 2 लाख करोड़ रुपये का राजस्व आता है। उसी में दस लाख दे रहे हैं। हमारे दादा-दादी की संरक्षित जमीन को बेचकर दस लाख दे रहे हैं। दलित-आदिवासी कल्याणकारी योजनाएं नहीं चाहिए। हम शिक्षा और रोजगार की मांग कर रहे है। कांग्रेस पार्टी दलित, आदिवासी और गिरीजन बच्चों को शिक्षित करने के लिए स्कूल और कॉलेज बनाये थे। केसीआर के 4,634 स्कूल बंद कर दिये। जूनियर कॉलेज बंद किये।

मुख्यमंत्री और शहीद परिवारों को क्या मिला

रेवंत रेड्डी ने कहा, “मल्लारेड्डी को एक विश्वविद्यालय और पल्ला राजेश्वर रेड्डी को अनुराग विश्वविद्यालय दिया है। सरकारी विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों के पदों को भर्ती किये बिना दलित और आदिवासी बच्चों को शिक्षा से दूर रखा जा रहा है। टीआरएस के शासनकाल में किसानों को न्यूनतम मूल्य और महिलाओं को 25 पैसे ब्याज पर ऋण नहीं दिया जा रहा है। मगर केसीआर को मुख्यमंत्री, बेटे और दामाद को मंत्री, बेटी को एमपी, एमएलसी और करीबी रिश्तेदार को राज्यसभा का पद मिला है। शहीदों के परिवारों को कुछ भी नहीं मिला है। बाप एक नंबरी है तो बेटा दस नंबरी है।”

बाप एक नंबरी तो बेटा दस नंबरी

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “केटीआर कहता है कि आईएएस बनना चाहता था। मगर बाप को बिना बताये राजनीति में आ गया। केके महेंद्र रेड्डी का टिकट छीन लिया क्या यह सच नहीं है? राजीव शर्मा, एसके जोशी और अनुराग शर्मा के कार्यकाल बढ़ा दिया और सेवानिवृत्ति के बाद सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया है। वहीं दलित प्रदीप चंद्रा को एक महीना काम करने के बाद सीएस के पद से सेवानिवृत्ति दे दिया गया। भूपालपल्ली कलेक्टर मुरली का अपमानित किये जाने के कारण उसने आईएएस अधिकारी के पद से इस्तीफा दे दिया। प्रवीण कुमार को डीजीपी बनने की सभी योग्यता होने के बावजूद केसीआर द्वारा अपमानित किया गया। उसे बर्दाश्त न कर उसने इस्तीफा दे दिया।

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