सूत्रधार: हर्षोल्लास के साथ संपन्न 41वीं मासिक गोष्ठी, इस बार इन तीन विषयों पर थी केंद्रित

हैदराबाद ((सरिता सुराणा की रिपोर्ट)): सूत्रधार साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, भारत हैदराबाद द्वारा आयोजित 41 वीं मासिक गोष्ठी बहुत ही हर्षोल्लास पूर्वक सम्पन्न हुई। संस्थापिका सरिता सुराणा ने सभी सम्मानित सदस्यों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन किया और संस्था के कार्यों के बारे में जानकारी प्रदान की।

श्रीमती तृप्ति मिश्रा ने बहुत ही मधुर स्वर में स्वरचित सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की। वरिष्ठ साहित्यकार चंद्रप्रकाश दायमा ने इस गोष्ठी की अध्यक्षता की। यह गोष्ठी स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबन्धन और चंद्रयान-3 मिशन के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर इनसे सम्बन्धित रचनाओं के पाठ पर आधारित थी। इस गोष्ठी में हैदराबाद की वरिष्ठ कवयित्री किरन सिंह ने हरिगीतिका छंद में अपनी रचनाएं प्रस्तुत की तो ज्योति गोलामुडी ने शिव आराधना से सम्बन्धित रचनाओं का पाठ किया।

भावना पुरोहित ने प्रकृति एवं मानव सम्बन्धों पर आधारित रचना का पाठ किया तो तृप्ति मिश्रा ने देशभक्ति गीत-छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी/नये दौर में लिखेंगे हम/फिर से नयी कहानी/हम हिन्दुस्तानी को बहुत ही सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया कटक, उड़ीसा से श्रीमती रिमझिम झा ने चंद्रयान-3 की सफलता पर अपना स्वरचित गीत प्रस्तुत किया तो बैंगलोर से अमृता श्रीवास्तव ने भी चांद पर अपनी रचना- जब भी चाहा है फिसला है/अब जा के हथेलियों पर ठहरा है को बहुत ही सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया।

कोलकाता से श्रीमती सुशीला चनानी ने रक्षाबन्धन पर बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया। वहीं युवा गज़लकार बिनोद गिरि अनोखा ने अपनी ग़ज़ल-जीवन भी एक रेल है प्रस्तुत करके सबकी वाहवाही लूटी। सरिता सुराणा ने अपनी रचना के माध्यम से चंद्रयान-3 की सफलता का श्रेय उन सभी वैज्ञानिकों को दिया, जिनके अथक परिश्रम से यह मिशन सफल हुआ।

सभी सहभागियों ने चंद्रयान-3 की सफलता के लिए इसरो के वैज्ञानिकों को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की और कहा कि यह प्रत्येक भारतवासी के लिए गौरवपूर्ण क्षण हैं। हमें हमारे वैज्ञानिकों पर गर्व है, जिन्होंने दिन-रात एक करके इस अभियान को सफल बनाया।

अध्यक्षीय काव्य पाठ करते हुए चन्द्र प्रकाश दायमा ने कुछ मुक्तक और एक ग़ज़ल-अब तो विश्वास पर भी विश्वास नहीं होता का शानदार वाचन किया। ग़ज़ल के सभी शेर लाजवाब थे। सभी सदस्यों ने मुक्त कंठ से उनकी प्रशंसा की। उन्होंने सभी सहभागियों की रचनाओं पर अपनी सारगर्भित टिप्पणी प्रस्तुत की। गोष्ठी पूर्णतया सफल और सार्थक रही। श्रीमती आर्या झा भी गोष्ठी में उपस्थित थीं। सरिता सुराणा ने सभी का हार्दिक आभार व्यक्त किया।

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