लेखक सुरेन्द्र मिश्र की दो पुस्तकें लोकार्पित, जानें पुस्तकों पर साहित्यकार और समीक्षकों के विचार

हैदराबाद : कादम्बिनी क्लब हैदराबाद एवं ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया हैदराबाद चॅप्टर के संयुक्त तत्वावधान में 21 सितंबर को रामकोट स्थित कीमती सभागार में लेखक सुरेन्द्र मिश्र कृत कहानी संग्रह ‘धूप छाँव और इंद्रधनुष’ एवं लघुकथा संग्रह ‘दर्पण’ का लोकार्पण व काव्य संध्या का आयोजन किया गया।

प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए डॉ अहिल्या मिश्र (क्लब अध्यक्षा) एवं मीना मुथा (कार्यकारी संयोजिका) ने बताया कि इस अवसर पर प्रथम सत्र में प्रो. ऋषभदेव शर्मा (वरिष्ठ साहित्यकार) कार्यक्रम की अध्यक्षता की। डॉ अहिल्या मिश्र, रुद्रनाथ मिश्रा (राजभाषा प्रबंधक NMDC) रमेश प्रसाद मिश्र (राजभाषा प्रबंधक पॉवर ग्रिड ऑफ इंडिया) लेखक सुरेन्द्र मिश्र, पुस्तक परिचय प्रस्तोता डॉ संगीता व्यास व डॉ सुषमा देवी मंचासीन हुए।

प्रवीण प्रणव के संचालन में माननीय अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के उपरांत डॉ सुषमा देवी ने माँ शारदे की वंदना प्रस्तुत की। डॉ अहिल्या मिश्र ने स्वागत संबोधन में क्लब को 398वीं गोष्ठी हेतु बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विशेष तौर पर हिन्दी दिवस और हिंदी पखवाडा की बातें करते हुए अवसर पर राजभाषा प्रबंधकों को अपने बीच उपस्थित पाकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने क्लब के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि 32 वें वर्ष की मासिक गोष्ठी की निरंतरता आप सबों के समर्पण और सहयोग के कारण ही संभव हुआ है। अहिंदी क्षेत्र में हिन्दी को बढ़ावा देना हमारा मुख्य कर्तव्य है। सुरेन्द्र मिश्र के कथा संग्रहों का लोकार्पण हेतु उन्हें अग्रिम बधाई और शुभकामनाएं दीं।

तत्पश्चात मंचासीन आतिथियों एवं मिश्र जी की पत्नी उषा मिश्र का सम्मान सदस्यों के कर कमलों से किया गया। पुस्तक परिचय के अंतर्गत “दर्पण” लघुकथा संग्रह के परिचय में डॉ संगीता व्यास ने कहा कि कहानियाँ यथार्थ का प्रातिबिंब है। कोई भी रचनाकार समाज में घटित घटनाओं पर लिखता है। लेखक ने ज्वलंत समस्याओं को हमारे समक्ष रखा है। पिता पुत्र के बीच वार्तालाप, वृद्धों की स्थिति, समय का मूल्यांकन, अवसर को पहचानना, प्यार की जरूरत आदि कई प्रश्नों को सुरेन्द्र मिश्र ने छुआ है।

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धूप छाँव और इंद्रधनुष’ पर विचार रखते हुए डॉ सुषमा देवी ने कहा कि इंद्रधनुष जीवन में रंगीनियों का प्रतीक है। हम मॉडर्न हो गए, अलग अलग ग्रहों पर जा रहे हैं लेकिन धरातल पर आज भी कई ज्वलंत समस्याएँ हैं। सुरेन्द्र मिश्र ने यथार्थ को हुबहू चिन्हित किया है। नई पीढ़ी को प्रेरणा भी दी गई है। निश्चित ही कथासंग्रह सुख-दुख और जीवन की जीवंतता का सुंदर मिश्रण है। सुरेंद्र मिश्र की नवासी सना ने अपनी बात रखते हुए कहा कि मेरे नानू बेस्ट फ्रेंड और मार्गदर्शक हैं।

मंचासीन अतिथियों के करकमलों से दोनों पुस्तकों का लोकार्पण करतल ध्वनि के साथ किया गया। सम्माननीय अतिथि रुद्रनाथ मिश्र ने लेखक को बधाई दी एवं अपने वक्तव्य में हिन्दी पर बात करते हुए कहा कि आज हिन्दी केवल पाठशाला तक ही नहीं बल्कि जनता तक पहुंच गयी है। हिन्दी साहित्य काफी समृद्ध है। तकनीकी साहित्य लिखनेवाले कम हैं। उन्होंने साहित्यकारों से अनुरोध किया कि कामकाजी विषयों पर भी वे सहयोग करें।

रमेश प्रसाद मिश्र ने अपने विचार रखते हुए कहा कि अच्छा साहित्य बहुत कम मिलता है। पुस्तक पढ़‌ना भी एक व्यायाम है। उन्होंने हिंदी भाषा के क्षेत्र पर बात एखते हुए कहा कि हम सभी साहित्य के प्रहरी हैं। शिक्षक गण विद्यालयों में इसे प्रस्तुत करते हैं और कार्यालयीन कामकाज में में इसे प्रसारित किया जाता है। हम सैनिक की तरह अपने सेवा में जुटे हुए हैं।

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लेखक सुरेन्द्र मिश्र और उषा मिश्र का क्लब की ओर से सम्मान किया गया। सुरेन्द्र मिश्र ने अपने मनोभाव व्यक्त करते हुए कहा कि हिन्दी भाषा और साहित्य से पहले से लगाव था। डॉ अहिल्या मिश्र और प्रो ऋषभदेव शर्मा मेरे प्रेरणा स्त्रोत रहे हैं। गोविंद मिश्र भी मेरे मार्गदर्शक रहे हैं। कहानियों के माध्यम से पिछले 50 वर्षों के मेरे अनुभव और घटनाएँ आपसे साझा की है। इस कार्य में साथ देने के लिए उन्होंने अपने परिवार के प्रति भी आभार व्यक्त की। डॉ अहिल्या मिश्र ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि इनकी हर लघुकथा पूर्णता का भास देती है। ये भावनाओं के उफान संवेदना के अंतःस्थाल को छूने के प्रयास हैं।

प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने अध्यक्षीय बात रखते हुए कहा कि सुरेन्द्र मिश्र ने इस आयु में भी अपने भीतर के बच्चे को बचा रखा है। उन्हें प्रणाम है। 2006 से सुरेन्द्र मिश्र जी से मेरा आत्मीय नाता है। कथाएं लक्ष्य को वेधने में समर्थ हैं। लिखने से पहले आपको लक्ष्य मालूम हो यह आवश्यक है। उन्होंने कहानी और मनुष्य की विकास यात्रा के बारे में बताते हुए कहा कि ये कहानियां लेखक के भीतर की छटपटाहट है। अपने अनुभव को आनेवाली पीढ़ी के साथ साझा करने की बेचैनी है। उन्होंने लेखक से बालकथा संग्रह लिखने की भी गुज़ारिश की।

जी. परमेश्वर (अनुवादक) ने प्रथम सत्र का धन्यवाद ज्ञापित किया। तत्पश्चात् स्व नीरज कुमार सिन्हा (संपादक दक्षिण समाचार और संरक्षक कादम्बिनी क्लब) को पटल की ओर से श्रध्दांजलि दी गई।

दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने की। डॉ अहिल्या मिश्र व जी. परमेश्वर भी मंचासीन रहे। काव्य गोष्ठी में मधु भटनागर, सत्यनारायण काकडा, विनोदागिरी अनोखा, डॉ संगीता शर्मा, सरिता दीक्षित, विजया डालमिया, डॉ मुमताज सुल्ताना, जी परमेश्वर, पुरुषोत्तम कडेल, विशाखा, राजकुमार यादव, डॉ आशा मिश्र, प्रवीण प्रणव, पूनम जोधपुरी, रवि वैद, वर्षा शर्मा, डॉ अहिल्या मिश्र, मीना मुथा ने भाग लिया। प्रो. प्रऋषभदेव ने अध्यक्षीय काव्यपाठ करते हुए सभी रचनाकारों को साधुवाद दिया।

साथ ही हर्ष लता कडेल, श्रुतिकांत भारती, गिरीश कुमार मल्होत्रा, अग्रवाल, दीपक दीक्षित, भावना पुरोहित, वासू, हरी, विनोदकुमार टंडन, के राजन्ना, सुरेश रजवानी, सुनीता गुप्ता, विनय कोटिया आदि की उपस्थिति रही। सत्र का संचालन मीना मुथा ने किया। सत्र का आभार डॉ आशा मिश्र दिया। समापन के पश्चात् स्वादिष्ट रात्रिभोज की भी व्यवस्था की गई थी। पुरुषोत्तम कडेल परिवार की ओर से डॉ आहिल्या मिश्र को जन्मदिन के उपलक्ष्य में सम्मानित किया गया।

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