कोरोना संक्रमितों की दूसरी लहर में मौत को लेकर बड़ा खुलासा

कोरोना की दूसरी लहर ने लोगों को गंभीर रूप से संक्रमण का शिकार बनाया। तीन माह से अधिक समय की इस लहर में मौत के आंकड़े भी काफी अधिक रहे। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल से मई के बीच 5,314 मौतें दर्ज की गईं। यह प्रतिदिन औसतन 87 मौतें या हर 15 मिनट में लगभग एक मौत के बराबर था। कोरोना के कारण होने वाली ज्यादातर मौत उन लोगों की हुई है जिनको पहले से ही कोई गंभीर बीमारी थी, हालांकि इसके बारे में पहले से उन्हें कोई जानकारी ही नहीं थी। कोविड-19 से हुई मौत के कारणों के बारे में जानने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कई स्तर पर अध्ययन किया है, जिसमें कई आश्चर्यजनक बातें सामने आई हैं।

एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टरों की एक टीम ने इस बारे में विस्तार से जानने के लिए कोरोना से मरने वाले 31 रोगियों के शवों का परीक्षण किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने मृतकों की मेडिकल हिस्ट्री और बायोलॉजिकल मार्कर के साथ हृदय, फेफड़े और रक्त वाहिकाओं का अध्ययन किया। इस अध्ययन में विशेषज्ञों को क्या खास बातें जानने को मिलीं, आइए इस बारे में आगे की स्लाइडों में विस्तार से जानते हैं।

कोरोना के गंभीर संक्रमण और मौत के मामले

कोरोना से मरने वाले लोगों के शवों के अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि मृतकों में से 67 फीसदी की आयु 60 से अधिक थी। डॉक्टर बताते हैं, मृतकों में ज्यादातर लोगों में कोमोरबिडिटी की शिकायत देखने को मिली। 87 फीसदी से ज्यादा को पहले से ही उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय संबंधी समस्याओं की शिकायत थी, जबकि 13 फीसदी को पहले से कोई भी दिक्कत नहीं थी।  स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि कई तरह की पहले से ही मौजूद स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां कोरोना संक्रमण की स्थिति में लोगों के लिए गंभीर मुसीबतों का कारण बन सकती हैं।

ज्यादातर रोगियों को गंभीर स्थिति का पता ही नहीं

अध्ययनकर्ता विशेषज्ञ बताते हैं, सबसे खास बात यह है कि लगभग 30% रोगियों यह पता ही नहीं था कि उनके हृदय या फेफड़े ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, या ऐसा भी हो सकता है कि उन्होंने संकेतों को नजरअंदाज कर दिया हो। इस तरह की स्थिति ज्यादा घातक रूप ले सकती है। ज्यादातर लोगों ने फेफड़ों से संबंधित समस्याओं के बारे में सूचना दी। छाती में होने वाली इस तरह की समस्याएं सांस लेने में दिक्कत का प्रमुख कारण हो सकती हैं। 

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में लखनऊ स्थित एक अस्पताल में छाती रोगों के विशेषज्ञ डॉ अभिजीत सारस्वत कहते हैं, कोरोना की दूसरी लहर में ज्यादातर रोगियों में फेफड़ों की समस्याएं देखने को मिलीं। संक्रमण के शुरुआती दिनों में ही कुछ लोगों में यह वायरस फेफड़ों पर तेजी से असर कर देता है, हालांकि समस्या की बात यह है कि लोग इसके शुरुआती लक्षणों पर ध्यान नहीं देते हैं। अगर समय रहते फेफड़े की दिक्कतों की पहचान कर ली जाए तो मामले को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है।

समय पर विशेषज्ञों की सलाह जरूरी

डॉ अभिजीत कहते हैं, दूसरी समस्या यह है कि जो लोग इन लक्षणों समझ भी पाते हैं, वह काफी समय के बाद विशेषज्ञ तक पहुंचते हैं, इससे पहले वह कई डॉक्टरों से अलग-अलग दवाएं ले चुके होते हैं, जिससे स्थिति गंभीर रूप ले लेती है। कोरोना के इस दौर में इन सावधानियों के साथ हमे सेहत को ठीक रखने के उपायों के बारे में गंभरीता से प्रयास करते रहने की जरूरत है। कोरोना जैसे संक्रमण भविष्य में भी होते रह सकते हैं, ऐसे में हमारे लिए प्रतिरक्षा को मजबूत करने वाले तरीकों पर गंभीरता से ध्यान देना आवश्यक है, जिससे पहले तो आप संक्रमण से बचे रहें, और अगर संक्रमण हो भी जाए तो गंभीर रूप ने लेने पाए। फिलहाल वैक्सीनेशन इस समस्या को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। (अमर उजाला से साभार)

नोट: यह लेख अध्ययन की रिपोर्ट और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार किया गया है।

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