ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया कर्नाटक चैप्टर की ओर से ‘त्यागमूर्ति हिडिम्बा’ पर चर्चा और लोकार्पण सम्पन्न

हैदराबाद : ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया कर्नाटक चैप्टर की ओर से युवा कथाकार पवन तिवारी के उपन्यास ‘त्यागमूर्ति हिडिम्बा’ पर ऑनलाइन चर्चा एवं लोकार्पण सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ अहिल्या मिश्र (हैदराबाद) ने की।

उन्होने उपन्यास पर अपनी बात रखते हुए कहा कि यह उपन्यास गहन अध्ययन का प्रतिफल है। पवन तिवारी ने महाभारत के आदि पर्व में वर्णित जनजातीय स्थितियां या राक्षसी प्रवृत्तियों को तदनुसार लिखा है। इस उपन्यास का उद्देश्य सत्य को उद्घाटित करना है। त्यागमूर्ति हिडिंबा के द्वारा उन्होंने एक स्त्री के त्याग को विशिष्टता दी है और उन्होंने इस उपन्यास के माध्यम से देश काल परिस्थिति को वर्तमान से जोड़ा है।

भाई हिडिम्ब और बहन हिडिंबा के बीच एक अलग संस्कृति

मुख्य अतिथि के रूप में सोमय्या महाविद्यालय मुम्बई के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष एवं साहित्यकार सतीश पांडेय (मुंबई) ने उपन्यास पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि इस उपन्यास में पवन तिवारी राक्षसी कुल के प्रति पूर्वाग्रह को तोड़ते हुए दिखाई देते हैं। भाई हिडिम्ब और बहन हिडिंबा के बीच एक अलग संस्कृति दिखाई देती है। जनजातीय संघर्ष को उभारते हैं। हिंसक वातावरण में रहते हुए अहिंसा के गुणों को बचाये रखने वाली हिंडिम्बा मानवीय रुप को स्थापित किया है।

हिडिंबा स्त्री शक्ति के प्रतीक है

विशिष्ट अतिथि व वक्ता के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिंतन दिशा साहित्यिक पत्रिका के संपादक हृदयेश मयंक (जौनपुर) ने अपनी बात रखते हुए कहा कि इस उपन्यास के द्वारा हिडिंबा स्त्री शक्ति के प्रतीक के रूप में उभरती है। पवन ने कमाल की भाषा का संधान करते हुए भारतीय जनजातियों के साथ नागर संस्कृति का समन्वय किया है।

महाभारत में हिंडिम्बा उपेक्षित पात्र हैं

प्रतिभावान लेखक श्री पवन तिवारी रचना प्रक्रिया के बारे में बताते हैं कि इस उपन्यास के लिखने का मुख्य कारण महाभारत में हिंडिम्बा उपेक्षित पात्र हैं। उन पर अधिक शोध करने पर वेदव्यास जी ने जो संकेत छोड़े थे, उन्हें पकड़कर तपस्विनी की तरह जीवन व्यतीत करने वाली महाभारत के युद्ध को निर्णायक मोड़ पर लाने वाली हिडिम्बा पर लिखने की प्रेरणा मिली। दो वर्ष के चिंतन और शोध का परिणाम यह उपन्यास है।

उपन्यास लिखने के लिए शुभकामनाएं

कार्यक्रम की प्रस्तावना डॉ इंदु झुनझुनवाला ने रखी। धन्यवाद ज्ञापन कवि राजेश जिन्दल ने किया। कार्यक्रम का उत्कृष्ट संचालन कर्नाटक चैप्टर की समन्वयक डॉ उषारानी राव ने किया। सभी ने पवन तिवारी को पौराणिक पात्र पर उपन्यास लिखने के लिए शुभकामनाएं दी।

इस अवसर पर डॉ प्रेम तन्मय, विश्वंभर दयाल, अरविंद पांडे, डॉ आशा मिश्रा, चंदा प्रहलादका, गीता शास्त्री, महेश राजा, पुरुषोत्तम चौधरी, राजेश कुमार, सतीश शुक्ला, श्रीहरि वाणी, स्वर्णा ज्योति, संतोष भाऊवाला, उषा धानी, वैश्णवी राव आदि ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। अनेक मित्रों ने इस कार्यक्रम की सराहना की।

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