आंध्र प्रदेश को एक और झटका, रायलसीमा लिफ्ट सिंचाई परियोजना के लिए पर्यावरण की अनुमति स्थगित

अमरावती : केंद्र सरकार ने कृष्णा नदी पर आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा निर्मित किये जा रहे रायलसीमा लिफ्ट सिंचाई परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी को स्थगित कर दिया है। परियोजना पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की आपत्तियों के बाद केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने छह मुद्दों पर एपी सरकार से अतिरिक्त जानकारी मांगी है। एपी सरकार की ओर से जानकारी के बाद अनुमति पर फैसला लिया जाएगा।

एपी सरकार ने पोत्तिरेड्डीपाडु हेड रेग्युलेटर से हर दिन 3 टीएमसी पानी को लिफ्ट करने के लिए निर्मित किये जाने वाले रायलसीमा लिफ्ट सिंचाई परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी के लिए आवेदन किया है।

इस मामले पर विशेषज्ञों की समिति ने विस्तार से चर्चा करने के बाद अनुमति को स्थगित कर दिया। एपी सरकार ने गालेरू-नगरी सुजलस्रवंती, श्रीशैलम दाहिनी नहर और तेलुगु गंगा परियोजना में रायलसीमा लिफ्ट सिंचाई परियोजना को एक अभिन्न अंग मानते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 19 सितंबर 1988 को श्रीशैलम दाहिनी नहर के लिए जारी किए गए परमिट में संशोधन करने का आग्रह किया है।

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सरकार ने बताया कि विभाजन के बाद कृष्णा जल में आंध्र प्रदेश को आवंटित 512 टीएमसी पानी में से 101 टीएमसी का उपयोग रायलसीमा में परियोजनाओं के लिए किया जा रहा है। इस पानी को हर दिन 3 टीएमसी डायवर्ट करने के लिए 3,825 करोड़ रुपये की लागत से रायलसीमा लिफ्ट सिंचाई परियोजना के लिए प्रस्तावित की गई है। इसमें फोरबे, पंपहाउस, पाइपलाइन और एप्रोच चैनल शामिल हैं। पहले प्रस्तावों में कुछ बदलाव करने के लिए पर्यावरण की अनुमति आवश्यकता हो गई है।

इतना ही नहीं, यह योजना नई नहीं है और श्रीशैलम जलाशय में जल स्तर 854 फीट से नीचे चला जाता है तो मौजूद योजनाओं के लिए पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। इन मुद्दों की जांच करने के बाद पर्यावरण विशेषज्ञों की समिति ने पिछले साल रायलसीमा लिफ्ट सिंचाई परियोजना पर एनजीटी द्वारा दिए गए निर्देशों पर भी अध्ययन किया है।

कमेटी ने विचार किया है कि नहरों के विस्तार का पर्यावरण पर कितना प्रभाव पड़ेगा? श्रीशैलम में 854 फीट नीचे से पानी को लिफ्ट करते समय कैसे परिणाम होगे? भूगर्भ निर्माण पर इसका कितना असर पड़ेगा? संवेदनशील क्षेत्रों पर पर्यावरणीय प्रभाव क्या होगा?

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