आंध्र प्रदेश सरकार की प्रतिष्ठा के साथ इज्जत भी गई, जानिए आगे क्या होगा

अमरावती : अगर कोई बैंक से कर्ज लेता है और निर्धारित समय तक भुगतान नहीं करता है तो उसके साथ क्या सलूक किया जाता है। बैंक के अधिकारी कर्ज के बकाया राशि के लिए दबाव डालते और आने वाली रकम को अपने खाते में जमा कर लेते हैं। यह नियम सिर्फ आम लोगों पर ही नहीं, सरकार पर भी लागू होता है। आंध्र प्रदेश सरकार के साथ भी कुछ ऐसा ही असाधारण समस्या उत्पन्न हो चुकी है। जगन सरकार ने अधिक ब्याज पर कर्ज लिया। मगर वह रकम खाते में जमा होने से पहले रुक गया है।

पता चला है कि आरबीआई ने जगन सरकार को कर्ज के रूप में लिये गये दो हजार करोड़ रुपये के अलावा, केंद्र सरकार की ओर से ओवरड्राफ्ट के तहत दिये गये 1,470 करोड़ रुपये को बकाया के रूप में खाते में जमा कर लिये हैं। इसके चलते एपी सरकार की प्रतिष्ठा के साथ इज्जत भी चली गई है। उधर सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी 10 तारीख बीत जाने के बाद भी वेतन इंतजार कर रहे हैं। एपी सरकार ने मंगलवार को वेतन के लिए प्रतिभूतियों के माध्यम से अधिक ब्याज पर दो हजार करोड़ रुपये कर्ज लिया। अब तक इतना ज्यादा ब्याज पर किसी भी सरकार ने नहीं लिया था। साथ ही केंद्र सरकार ने राजस्व घाटे के तहत राज्य को 1470 करोड़ रुपये दिये। इससे कर्मचारी और पेंशनभोगी वेतन मिलने की आस लगाये बैठे थे। मगर सरकार का ओवरड्राफ्ट (OD) उनके लिए अभिशाप बन गया।

ओवरड्राफ्ट के रूप में ली गई रकम को निर्धारित समय के भीतर भुगतान किया जाना चाहिए। जगन सरकार ओडी भुगतान करना भूल गई। यह देखकर आरबीआई खामोश थोड़ी ही बैठती। प्रतिभूतियों के रूप में मिले दो हजार करोड़ रुपये और केंद्र सरकार की ओर से दिये 1,470 करोड़ रुपये अर्थात कुल 3,470 करोड़ रुपये को आरबीआई ने ओवरड्राफ्ट खाते में जमा कर लिये। अब कर्मचारी और पेंशनभोगियों के लिए फिर से कर्ज लेने की स्थिति उत्पन्न हो गई है। वित्त विश्लेषकों का कहना है कि 800 करोड़ रुपये का भुगतान करने पर जगन सरकार ओडी से मुक्त होगी। दूसरी ओर ओडी का बकाया 80 फीसदी पार हो गया है। इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार को एक बार फिर ओडी के लिए जाने की आवश्यकता है। मगर वित्त विभाग यह साहस नहीं कर पा रही है।

क्यों कि अगर ओडी 1400 करोड़ रुपये से ऊपर लिया जाता है, तो उसे चार दिन में चुकाना पड़ता है। अगर यह इससे कम लिया गया है तो 14 दिन के भीतर चुकाना होगा। मगर पहले से ही 800 करोड़ रुपये की ओडी है। इसलिए वेतन और पेंशन के लिए ओडी के लिए गये तो 1,400 करोड़ रुपये पार हो जाएगी। ऐसा किया जाता है तो चार दिन के भीतर ओडी का भुगतान किया जाना चाहिए। अगर इतने कम समय में इतनी रकम मिलने की संभावन नहीं है। यदि ओडी लेती है तो जगन सरकार और मुश्किल में पड़ सकती है।

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