आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष: 75 सालों की उपलब्धियों को स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा

लंबे समय तक कठोर संघर्ष एवं असंख्य वीरों की ओर से अपने प्राणों की आहुति देने के बाद 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराकर स्वाधीन भारत का ऐलान किया। 26 जनवरी 1950 को नया संविधान लागू हुआ। इसके अंतर्गत देश के सभी नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे का आश्वासन दिया गया तथा भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया गया।

इस वर्ष हम अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं और पिछले 74 सालों मे हमारे देश ने बहुत सारी उपलब्धियां हासिल की है स्वतंत्रता के बाद देश को कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अंग्रेजों की कुटिल चाल से देश का विभाजन हो गया। लाखों बेघर हुए लोगों का सरकार की ओर से पुनर्वास किया गया। महान स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को नमन करते हुए भविष्य में एक ऐसे भारत का नव निर्माण का सपना देखा गया जहां अशिक्षा, संप्रदायवाद, अंधविश्वास व अन्य सामाजिक कुरीतियों का अस्तित्व ही ना बचे। इसके लिए समय-समय पर जनता को जागरूक भी किया जाता है।

देश की रक्षा हेतु सैनिकों को प्रशिक्षित किया गया। साथ ही, परमाणु बम का भी सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। ताकि भविष्य में शत्रु देशों की बुरी नजर देश सुरक्षित रह सके। सरकार द्वारा जगह-जगह चिकित्सालय खोलकर जरूरतमंदों को मुफ्त में इलाज किया जा रहा है।
खेल के क्षेत्र में देश के महान खिलाड़ियों ने विभिन्न खेलों में जीत हासिल कर कई रिकॉर्ड तोड़े है। स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल किये हैं, जो अत्यंत सराहनीय है।

आजादी से पहले दूसरे देशों पर निर्भर रहने वाला भारत आज कृषि और औद्योगिक उत्पादन दोनों क्षेत्र में आत्मनिर्भर है। नए-नए उद्योगों को विकसित कर बेरोजगारों को रोजगार प्रदान किया जा रहा है। देश की महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने को प्रोत्साहित किया जाता है। संसद में मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक देने की प्रथा पर रोक एवं सालों से चले आ रहे मंदिर-मस्जिद विवाद को बिना किसी दंगे के खत्म करना ऐतिहासिक फैसला माना जाएगा एवं भविष्य में इतिहास के सुनहरे पन्नों पर लिखा जाएगा। सबसे बड़ी उपलब्धि हमारे प्रधानमंत्री जब विदेशों में जाकर अपनी राष्ट्रभाषा हिन्दी मे भाषण देते हैं तो हमें अपनी भाषा पर गर्व महसूस होता है।

– भारती सुजीत बिहानी सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल की कलम से…

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