विशेष संपादकीय : टीपीसीसी को मिला दमदार अध्यक्ष रेवंत रेड्डी, क्या लेकर आएंगे कांग्रेस का पुराना वैभव?

रेवंत रेड्डी 7 अप्रैल को गांधी भवन में टीपीसीसी अध्यक्ष पदभार ग्रहण करने वाले हैं। इससे पहले सुबह 10 बजे रेवंत रेड्डी जुबली हिल्स स्थित ‘पेद्दम्मातल्ली’ मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद नामपल्ली स्थित दर्गा में विशेष प्रार्थना कार्यक्रम में भाग लेंगे। दोपहर 12 बजे रेवंत रेड्डी गांधी भवन में टीपीसीसी अध्यक्ष पदभार ग्रहण करेंगे। इसके लिए गांधी भवन में बड़े पैमाने पर तैयारी की गई है। शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने अन्य राज्यों से भी प्रमुख नेता आ रहे हैं।

इस समय सबकी नजरें टीपीसीसी अध्यक्ष रेवंत रेड्डी पर टिकी है। तेलंगाना कांग्रेस को दिवंगत मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के बाद तेलंगाना के लिए एक दमदार अध्यक्ष मिला है। जबसे रेवंत की अध्यक्ष के रूप घोषणा की गई, तब से तेलंगाना कांग्रेस में नया जोश आ गया है। ऐसा नहीं कि कांग्रेस पार्टी में इससे पहले से नेता नहीं है। अनेक वरिष्ठ नेता मौजूद हैं। मगर रेवंत रेड्डी जैसी न उनमें बोलने की शैली हैं और न ही किसी भी विषय पर टिप्पणी करने में दम हैं।

रेवंत रेड्डी दिल्ली से हैदराबाद आते ही रूठे हुए अनेक नेताओं को मनाने में लग गये। इसमें वह सफल भी हो रहे हैं। किसी भी मौके को रेवंत अपने हाथ से गंवाना नहीं चाहते हैं। अब तक किसी भी कांग्रेस के नेताओं ने ऐसा नहीं किया है, जैसा रेवंत रेड्डी कर रहे हैं। सबको साथ लेकर चलने का जो संकल्प रेवंत ने लिया है। इससे हर जिले के नेता और कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है।

इतना ही नहीं तेलंगाना के लोगों के सामने स्पष्ट दिख रहा है कि एक धनवान तेलंगाना को केसीआर ने कैसे कंगाल बना दिया। हम यह नहीं कहते है कि कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद सब कुछ बदल जाएगा। तेलंगाना धनवान बन जाएगा। तेलंगाना की जनता चाह रह है कि एक निरंकुश और दमनकारी परिवार राज खत्म हो जाये।

इसी क्रम में रेवंत रेड्डी में दो मायनस प्वाइंट (Minus point) है। एक तेलुगु देशम पार्टी से आये हुए नेता है। चंद्रबाबू नायुडू इसी तेलुगु देशम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष है। पृथक तेलंगाना के समर्थन में पत्र देने के बावजूद चंद्रबाबू ने दोहरी नीति अपनाई थी। इसी दोहरी नीति के कारण तेलंगाना में आज टीडीपी न घर रही और नहीं घाट की रही है। इसी दलदल में रेवंत रेड्डी काफी दिनों तक फंसे रहे। हां, यह सच है कि तेलंगाना में टीडीपी के कार्यकर्ता और प्रशंसक अधिक संख्या में मौजूद हैं। इसी बीच रेवंत रेड्डी ने एक मीडिया के प्रमुख व्यक्ति से मिले हैं। जिसकी रेवंत को काफी जरूरत है। क्योंकि हर पार्टी को आज मीडिया के सहयोग और समर्थक के बिना काम नहीं बनता है। कहा जाता है कि वह मीडिया चंद्रबाबू का समर्थक है।

दूसरा यह है कि रेवंत रेड्डी वोट के बदले नोट मामले में आरोपी है। इन दो अपवाद को छोड़कर रेवंत रेड्डी में इतनी ताकत है कि वह कांग्रेस पार्टी को पुराना वैभव लौटा सकते है। क्योंकि टीआरएस सरकार ने तेलंगाना की भावनाओं के साथ जितना और जिस तरह से खिलवाड़ किया है, उसे तेलंगाना की जनता अब बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं है। मुख्य रूप से पृथक तेलंगाना आंदोलन में शहीद हो चुके परिवार तो केसीआर के शासन का अंत चाह रहे हैं और इसी में तेलंगाना का भला मानते हैं।

इतनों दिनों से तेलंगाना के लोग टीआरएस के खिलाफ एक वैकल्पिक पार्टी को ढूंढ रहे थे। अब तेलंगाना में कांग्रेस, बीजेपी और शर्मिला की वाईएसआर तेलंगाना पार्टी वैकल्पिक दल हो गये हैं। इसके अलावा अन्य पार्टियां भी है, मगर वो टीआरएस के लिए वैकल्पिक नहीं हो सकती हैं। अब देखना है कि आने वाले चुनाव तक तेलंगाना में रेवंत रेड्डी कैसे आगे बढ़ते है। मंजिल आसान तो नहीं, मगर मुश्किल भी नहीं है। याद रहे तेलंगाना लोग त्याग करने वालों पर ही विश्वास करते हैं। चाहे पार्टी हो या नेता।

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