केंद्रीय हिंदी संस्थान: सिंधुदुर्ग जिले के माध्यमिक विद्यालय के हिंदी अध्यापकों के नवीकरण कार्यक्रम का समापन

हैदराबाद: केंद्र केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के हैदराबाद केंद्र द्वारा महाराष्ट्र राज्य के सिंधुदुर्ग जिले के माध्यमिक विद्यालय के हिंदी अध्यापकों के प्रशिक्षण के लिए 465वें नवीकरण पाठ्यक्रम का आयोजन 20 नवंबर से 1 दिसंबर तक सिंधुदुर्गनगरी के जिला शिक्षण व प्रशिक्षण संस्था (डाएट) में किया गया।

शुकवार को नवीकरण कार्यक्रम का समापन समारोह केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के निदेशक प्रो. सुनील कुलकर्णी जी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में सिंधुदुर्ग जिला हिंदी शिक्षक संघ के अध्यक्ष कैलाश जाधव जी तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला माध्यमिक शिक्षणाधिकारी डॉ. सुभाष चौगुले जी उपस्थित थे।

इस दौरान प्राथमिक शिक्षणाधिकारी डॉ. कडालकर, डाएट के अधिव्याख्याता डॉ. आचरेकर, श्री मानेकर, अतिथि अध्यापक डॉ. योगेंद्रनाथ मिश्र तथा पंकज सिंह यादव तथा सिंधुदुर्ग जिला हिंदी शिक्षक संघ के पदाधिकारी एवं पाठ्यक्रम संयोजक-हैदराबाद केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. गंगाधर वानोडे उपस्थित थे। इस नवीकरण पाठ्यक्रम में कुल 44 (महिला – 24, पुरुष – 20) हिंदी अध्यापक प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।

नवीकरण पाठ्यक्रम में प्रशिक्षण के दौरान क्षेत्रीय निदेशक डॉ. गंगाधर वानोडे के साथ-साथ अतिथि अध्यापक डॉ. योगेंद्रनाथ मिश्र, पंकज सिंह द्वारा प्रतिभागियों को विभिन्न विषयों का अध्यापन कार्य किया गया जैसे- हिंदी व्याकरण, भाषाविज्ञान, उच्चारण तथा लेखन अशुद्धियों को दूर करना, भाषा परिमार्जन, भाषा शिक्षण, साहित्य शिक्षण, हिंदी में रोजगार की संभावनाएँ, हिंदी शिक्षण व प्रौद्योगिकी का प्रयोग, आदि। अतिथि अध्यापक डॉ. देवीदास बोरडे ने “हिंदी-मराठी-हिंदी अनुवाद प्रक्रिया” विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। अतिथि अध्यापक डॉ. निलेश कारेकर ने “कविता शिक्षण” विषय पर विशेष व्याख्यान दिया।

समापन समारोह का प्रारंभ श्रीमती अस्मिता मोरजकर तथा समूह द्वारा गणेश स्तुति, सरस्वती वंदना से किया। श्री प्रदीप देसाई, अनुष्का गावड़े तथा समूह ने संस्थान गीत प्रस्तुत किया। श्रीमती संजीवनी गवस, चारुता परब तथा समूह में स्वागत गीत गाकर मंच पर उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया गया। अतिथि अध्यापक श्री पंकज सिंह द्वारा अतिथियों का परिचय प्रस्तुत किया तथा स्वागत व अभिनंदन किया। तत्पश्चात अतिथियों को शॉल-श्रीफल देकर सम्मानित किया गया।

समापन समारोह में दौरान विशिष्ट अतिथि जिला माध्यमिक शिक्षणाधिकारी डॉ. सुभाष चौगुले ने संबोधित करते हुए कहा कि सभी अध्यापक इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का प्रयोग अपने विद्यार्थियों को अध्यापित करने के लिए करें। जिला प्राथमिक शिक्षणाधिकारी डॉ. प्रदीप कुडालकर ने प्रतिभागियों को अध्यापन कार्य में तत्पर तथा अपने आपको हमेशा अद्यतन रहने के लिए प्रेरित किया। मुख्य अतिथि कैलाश जाधव ने अपने संबोधन में कहा कि सभी अध्यापकों को अपने कार्य के प्रति सजग और विद्यार्थियों को अध्यापन करते समय विभिन्न पद्धतियों का प्रयोग करना चाहिए।

समापन समारोह के अध्यक्ष केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के निदेशक प्रो. सुनील कुलकर्णी जी ने सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि संस्थान द्वारा भारत भर हिंदीतर क्षेत्र में आयोजित नवीकरण पाठ्यक्रमों के प्रशिक्षण में हिंदी अध्यापकों को हिंदी ध्वनियों के उच्चारण, लेखन, भाषा कौशल एवं भाषा शिक्षण, सृजनात्मक लेखन, साहित्य शिक्षण आदि विधाओं पर प्रशिक्षण देता है।

प्रशिक्षण के दौरान आपने जो भी ज्ञान अर्जित किया है उसका प्रयोग अपने अध्यापन कार्य में कीजिए। पाठ्यक्रम संयोजक एवं क्षेत्रीय निदेशक डॉ. गंगाधर वानोडे ने प्रतिभागियों को हर रोज दूरदर्शन के समाचार ध्यानपूर्वक सुनकर अपने उच्चारण में सुधार करने को कहा साथ ही हिंदी की किसी भी पुस्तक को पढ़कर वर्तनी को ध्यान से देखकर रोज 15-20 वाक्य लिखने के लिए प्रोत्साहित किया। इससे वर्तनी दोष, अशुद्धियों को दूर करने में सुविधा होगी।

समापन समारोह के दौरान प्रतिभागी अध्यापकों ने अपने प्रतिक्रिया में कहा कि वे इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का लाभ हम विद्यार्थियों के अध्यापन कार्य में अवश्य करेंगे तथा अपने आपको अद्यतन रखेंगे। प्रतिभागियों ने हिंदी देशभक्ति गीत, लोक गीत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का सफल संचालन हिंदी अध्यापक श्री अनिल घुगे ने किया तथा आभार एवं धन्यवाद ज्ञापन श्री गोपाल गवस ने प्रस्तुत किया। इस दौरान सभी प्रतिभागी तथा केंद्र के प्रशासनिक सदस्य श्री संदीप कुमार तथा ‌श्री शेख मस्तान वली उपस्थित थे।

नवीकरण पाठ्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने “सिंधुदुर्ग की पहचान” नामक हस्तलिखित पत्रिका की रचना की। इस पत्रिका का विमोचन समापन समारोह में उपस्थित अतिथियों के कर-कमलों द्वारा किया गया। संपादन का कार्य हिंदी शिक्षक श्री चंद्रकांत चव्हाण द्वारा किया गया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों का पर-परीक्षण लिया गया। इसमें प्रथम पुरस्कार श्रीमती विनीता कविटकर, द्वितीय पुरस्कार श्रीमती संजीवनी गवस तथा तृतीय पुरस्कार श्रीमती नसरीन डांगे ने प्राप्त किया। प्रशिक्षण प्राप्त सभी प्रतिभागियों को मंचस्थ अतिथियों के कर-कमलों द्वारा प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।

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