विशेष: बुराई पर अच्छाई की, अंधकार पर प्रकाश की, असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है दीपावली

विविध संस्कृति वाले देश भारत में विभिन्न जातीय पृष्ठभूमि से आने वाले लोग अपनी संस्कृति और धार्मिक जश्न एक साथ मनाते हैं। दीपावली देश भर में मनाये जाने वाले सबसे बड़े भारतीय त्योहारों में से एक है। इसे पूरे देश में बहुत ही धूमधाम और जोश के साथ मनाया जाता है। इसे ‘रोशनी का त्योहार’ भी कहा जाता है। वैसे तो हर त्योहार मनाने के पीछे मुहब्बत की भावना छिपी होती है। परिवार एक साथ मिलते हैं। अपने घरों को रोशनी से सजाते हैं। देवी लक्ष्मी से ख़ुशी और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।

भारत के उत्तरी राज्य इस त्योहार को दिवाली के रूप में उल्लेख करते हैं। वहीं दक्षिण भारतीय राज्यों और सिंगापुर, मलेशिया जैसे अन्य एशियाई देशों में दीपावली (दीप/रोशनी वली/कतार-दीपों की कतार) के रूप में जाना जाता है। हालांकि, दोनों ही क्षेत्रों में इसे समान उत्साह के साथ मनाया जाता है।

दीपावली का हिंदू त्योहार भगवान विष्णु के अवतार भगवान राम की चौदह साल के वनवास से वापसी और दानव राजा रावण पर विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की, अंधकार पर प्रकाश की, असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है।

कर्नाटक के ग्रामीण हिस्से में, दीपों के इस उत्सव में देवी लक्ष्मी की पूजा करने के अलावा भी कई दिलचस्प अनुष्ठान होते हैं। जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं आदि। कर्नाटक के शहरी हिस्सों में, दीपावली देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु दोनों की पूजा करने के इर्द-गिर्द घूमती है। जहां देवी लक्ष्मी को धन और समृद्धि के लिए पूजा जाता है, वहीं भगवान विष्णु की पूजा बाली पर उनकी विजयी जीत के लिए की जाती है। लोग त्योहार मनाने के लिए अपने घरों को रोशनी दीयों, फूलों की व्यवस्था, रंगोली और बहुत कुछ से सजाते हैं।

दीपावली 2021 में COVID-19 को ध्यान में रखते हुए इस त्योहार को छोटे स्तर पर ही मनाया जाना अच्छी बात है। वायरस को और फैलने से रोकने के लिए अच्छा है कि हानिकारक पटाखों को फोड़ने पर अपनी चाहत पर लगाम लगायी जाये। क्योंकि वायु प्रदूषण में वृद्धि महामारी की स्थिति के लिए मुश्किल हो सकती है। अगर हमें पटाखे जलाना है तो भी पर्यावरण के अनुकूल पटाखों का उपयोग करके एक सरल और शांत दिवाली समारोह मनाने में ही हम सबकी भलाई है।

चलिए अपने अंदर के विचारों की नकारात्मकता, जलन, देवेष के जाले इस साल साफ़ कर लें। यह भी एक तरह की दिवाली की सफाई ही है। आइए हम सभी रोशनी के इस त्योहार को अधिक सरल लेकिन सार्थक और भक्तिपूर्ण तरीके से मनाएं और समृद्धि की देवी से प्रार्थना करें कि वह हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाये।

– अमृता श्रीवास्तव बेंगलुरु की कलम से

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